सबसे बड़ा कट्टरपंथी :मध्यवर्ग

कौन सा धर्म कट्टरपंथी है या कौन सा नहीं यह एक बहुत लम्बी बहस हो सकती है , जो किसी हिंदी भाषी चैनल पर अच्छी खासी टी.आर.पी बटोर सकती है । अपनी कट्टरता को धर्म का नाम देकर कट्टरपंथी धर्म की आड़ में छुपे बैठे होते हैं । अलग-अलग तरह के नमूने पेश करके अपने आप को छुपाते हैं । और सबसे अधिक इसकी चपेट में आता है मध्यवर्गीय समाज । और मध्यवर्गीय व्यक्ति ही इसका निर्माता भी है । वो मध्यवर्ग जो लोग क्या कहेंगे के डर से धर्म को सहारा बनाकर झेल जाता है फिर वही लोग जो उसी समाज का हिस्सा हैं जहाँ वो रहता है , उसे अपना आदर्श मानते हैं । फलाने ने अपने माँ बाप के लिये अपने सपने छोड़ दिये , उसकी लड़की कितनी होशियार है हमेशा पढ़ती है कहीं बाहर नहीं जाती बेचारी अच्छी है बड़ी , देखा उस लड़के ने अपने माँ बाप के कहने पर शादी की, उसके पिताजी कितने अच्छे हैं कुछ नहीं कहते , उसकी माँ कभी बाहर  किसी से नहीं बोलती । क्या हम इसे नहीं कहेंगे कट्टरपंथी की पराकाष्ठा । कौन तय करता है यह की कौन अच्छा कहलाया जायेग और कौन नहीं ,और किस मायनों में । मेरी माँ ने बताया एक दिन टेलर शाप में एक घर में काम करने वाली बाई मैली साड़ी और  बिना अस्तर का झीना ब्लॉउज़ पहन कर शाप पर घुसी तो एक सभ्य समाज की महिला ने उसे ऊपर से नीचे तक तलाशा और तलाशी उसके ब्लॉउज़ पर रुकी और वह तपाक से बोल पड़ी ऐसे कपड़े पहनेगी फ़िर बोलेंगी हमें छेड़ दिया । अब उस कट्टरपंथी सभ्य महिला को क्या पता की अस्तर 100 ₹ से कम में नहीं लगता । उस औरत के पास तो शायद साबुन खरीद कर मैली साड़ी धोने के पैसे भी ना हों । तो क्या सबसे बड़ी कट्टरपंथी मध्यवर्गीय औरत हुई  जो उस गरीब महिला पर ताने कस रही थी ?!
या उस औरत को ऊपर से नीचे तक देखने वाला कोई पुरुष?!

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